Rina Badiani Manek
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Profile Information

First Language
Gujarati
Second Language
English
Interests
Poetry, reading, music

Rina Badiani Manek's Blog

Don'T Go Far Off / Pablo Neruda

Posted on July 29, 2015 at 6:36pm 0 Comments

Don't go far off, not even for a day, because --

because -- I don't know how to say it: a day is long

and I will be waiting for you, as in an empty station

when the trains are parked off somewhere else, asleep.



Don't leave me, even for an hour, because

then the little drops of anguish will all run together,

the smoke that roams looking for a home will drift

into me, choking my lost heart.



Oh, may your silhouette never dissolve on the… Continue

दस्तक / रीना

Posted on July 5, 2015 at 6:54pm 0 Comments

हर दस्तक पे
दिल धड़कने लगता है
कोई अनजान डर से....
कुछ बढ़ ही जाती है तन्हाई......

कभी महसूस होता है
जैसे कहीं
ईंट पर ईंट चढ़ती जा रही है
न कोई दरवाज़ा ...
न कोई दस्तक....
और फिर भी एक इन्तज़ार
कोई आए !!!!
और
तोड़ दे यह पाँचवीं दीवार ..

बनफ़्शे का फूल / परवीन शाकिर

Posted on July 3, 2015 at 6:57pm 0 Comments

वह पत्थर पे खिलते हुए

ख़ूबसूरत बनफ़्शे का इक फूल थी

जिसकी सांसों में जंगल की

वहशी हवाएँ समायी हुई थी

उसके बेसाख़्ता हुस्न को देखकर

इक मुसाफ़िर बड़े प्यार से तोड़ कर

अपने घर ले गया

और फिर

अपने दीवानख़ाने में रक्खे हुए

काँच के खूबसूरत से फूलदान में

उसको ऐसे सजाया

कि हर आनेवाले की पहली नज़र

उस पे पड़ने लगी

दाद-ओ-तहशी की बारिश में

वह भीगता ही गया



कोई उससे कहे

गोल्डन लीफ़ और यूडीकोलोन की

नर्म शहरी महक… Continue

बनफ़्शे का फूल / परवीन शाकिर

Posted on July 3, 2015 at 6:53pm 0 Comments

वह पत्थर पे खिलते हुए

ख़ूबसूरत बनफ़्शे का इक फूल थी

जिसकी सांसों में जंगल की

वहशी हवाएँ समायी हुई थी

उसके बेसाख़्ता हुस्न को देखकर

इक मुसाफ़िर बड़े प्यार से तोड़ कर

अपने घर ले गया

और फिर

अपने दीवानख़ाने में रक्खे हुए

काँच के खूबसूरत से फूलदान में

उसको ऐसे सजाया

कि हर आनेवाले की पहली नज़र

उस पे पड़ने लगी

दाद-ओ-तहशी की बारिश में

वह भीगता ही गया



कोई उससे कहे

गोल्डन लीफ़ और यूडीकोलोन की

नर्म शहरी महक… Continue

Comment Wall (1 comment)

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At 2:14pm on July 2, 2014, Jenny Osah said…

Hi dear how are you? my name is Jenny i will love to communicate with you

dear here is my mail id to know more about me

jennyosah@hotmail.com

thanks

Jenny.

 
 
 

Blog Posts

पंच तत्व

Posted by Sakshi garg on February 16, 2021 at 11:18pm 0 Comments

जब मुझे पता चला कि तुम पानी हो
तो मै भीग गया सिर से पांव तक ।

जब मुझे पता चला कि तुम हवा की सुगंध हो
तो मैंने एक श्वास में समेट लिया तुम्हे अपने भीतर।

जब मुझे पता चला कि तुम मिट्टी हो
तो मै जड़ें बनकर समा गया तुम्हारी आर्द्र गहराइयों में।

जब मुझे मालूम हुआ कि तुम आकाश हो
तो मै फैल गया शून्य बनकर।

अब मुझे बताया जा रहा है कि तुम आग भी हो•••
तो मैंने खूद को बचा कर रख है तुम्हारे लिए।

तुम !

Posted by Jasmine Singh on February 16, 2021 at 7:23pm 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 30, 2021 at 10:38am 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 29, 2021 at 6:07pm 0 Comments

इस बात से डर लगता है

Posted by Monica Sharma on January 24, 2021 at 11:02pm 0 Comments

रूठ जाने को दिल चाहता है

पर मनाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

आंखों से बहते है झरने से आंसू

तुम हंसाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

कहते हो मुझ में खूबी बहुत है

गले से लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

इंतज़ार पर तेरे तो हक़ है मेरा

पर इस राह से आओगे या नही

इस बात से डर लगता है

ज़ख़्म इतने है के दिखा ना सके

मरहम लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

तेरे लिए मौत को भी गले लगा ले

आखिरी पल देखने आओगे या नही

इस…

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प्यार का रिश्ता

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:50pm 0 Comments

शानदार रिश्ते चाहिए

तो उन्हें गहराई से निभाएं

भूल होती है सभी से

पर अपनों के ज़ख्मों पर मरहम लगाए

तेरी मीठी सी मुस्कान

दवा सा असर दिखाती है

कंधे पर रख कर सिर

जब तू मुझे समझाती है

ग़म की गहरी काली रात भी

खुशनुमा सुबहों में बदल जाती है

मैं साथ हूं तेरे ये बात जब तू दोहराती है

मिस्री सी जैसे मेरे कानों में घुल जाती है

सुनो। कह कर जब बहाने से तू मुझे बुलाती है

मेरे" जी" कहने पर फिर आंखों से शर्माती है

बिन कहे तू जब इतना प्यार…

Continue

मेरा सच

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:30pm 0 Comments

जवाब दे सको शायद

ये तेरे लिए मुमकिन ही नही

मगर इंतजार पर आपके

बस हक़ है मेरा

बिन कहे तेरी आंखों को पढ़

ले जिस दिन

समझो इश्क़ मुकमिल हुआ मेरा उस दिन

हसरत है तेरी ज़रूरत नहीं ख्वाहिश बन जाएं

जिद है मेरी हर सांस पे तेरा नाम आए

जिस दिन देख मेरी आंखों की नमी

तुझे महसूस हो जाएं कहीं मेरी कमी

मेरे सवाल तुमसे जुड़ने का बहाना है

वरना हमें भीड़ में भी नही ठिकाना है

जीते है तुझे खुश करने को हम

तेरे आंगन में खुशियों के रंग भरने को…

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