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बंजर ज़मीन हूं मैं !

Added by Jasmine Singh on October 18, 2020 at 8:10am — No Comments

શું? આ છે જિંદગી !

મૃગ તરસે જળ દોડી દોડી હાથધર્યું ઝાંઝવાનીર, માનવ ભૂખ્યો પ્રેમનો મથામણ કરી પામ્યો વહેમ 

શું? આ છે જિંદગી !

રોણુ જન્મ ને મરણ સમયે સમાન મનોવ્યથા, આંતરીક ગુપશુપ ચાલી રહી ભીતર

શુ ? આ છે જિંદગી !

રાજકુમારો ને મહેલોના સપનામાં  રાચતા, આંખો ખુલી અરે ! આતો મૃગજળસમું સ્વપ્નલોક

શુ? આ છે જિંદગી !

મુખપર હસી ઠીઠોલી, મનમાં કરોડો તરંગ ઉછળે! વિચારે તો જાણે ઘેરો ઘાલ્યો

શુ? આ છે જિંદગી !

ભોરથતા આશબંધણીકાલે નહીતો આજે, હશે પિયુ સંગ સ્નેહમિલન પણ આતો…

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Added by Sonu on October 15, 2020 at 7:36pm — No Comments

तुझको लिखती रहूंगी मैं !

तुझे लिखती रहूंगी मैं

तेरे प्यार की स्याही में

अपनी कलम को डुबो कर

इस ज़िंदगी के पन्नों पे

तेरे साथ जिये लम्हों को

कविताओं में बुनकर

तुझको लिखती रहूंगी मैं

तुझको जीती रहूंगी मैं

तू वो है जो मेरे साथ है

और मेरे बाद भी रहेगा

कभी किसी के होठों में हंसेगा

किसी की आंखों से बहेगा

किसी अलमारी के पुराने

दराज की खुशबु में महकेगा

किसी की आंखों की गहराई

जब जब मेरे शब्दों में उतरेगी

तब तब मेरे बाद तुझे पढ़ने वालों के…

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Added by Jasmine Singh on October 15, 2020 at 1:22am — No Comments

इल्ज़ाम ए इश्क़

धीरे-धीरे सब दूर होते गए

वक़्त के आगे मजबूर होते गए

रिश्तों में हमने ऐसी चोट खाई की

बस हम बेवफ़ा और सब बेकसूर होते गए

इल्ज़ामों की श्रृंखला बड़ी लंबी थी साहेब

वो लगाते गए हम मुस्कुराते गए

अपनी झुकी हुई भीगी पलकों के नीचे

जख्म ए इश्क़ हम छुपाते चले गए

बरसों किया इंतजार हमने

तेरी मीठी सी मुस्कान का

पर बेरहम तुम नजरों से

कत्ल करने को खंजर चलाते गए

जिक्र ए इश्क़ जो कभी सुनाई दे

जुबां पे तेरा नाम और

नज़रों में तेरा अक्स दिखाई…

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Added by Monica Sharma on October 14, 2020 at 9:12pm — No Comments

आसमान से ऊंचा

अक्सर सिर की छत बन कर धूप और बारिश से बचा लेता है पिता...

यूं ही नहीं उसे आसमान से भी ऊंचा कहते ।

Added by Sakshi garg on October 14, 2020 at 10:16am — 1 Comment

दो बातें

कुछ बातें इन दो कारणों से भी तकलीफ दे देती हैं : 

1• काश ! ये सब सच होता ।;

2• काश ! ये सब झूठ होता ।

Added by Sakshi garg on October 14, 2020 at 10:13am — No Comments

पिता

मुझे रखा छांव में, खुद जलते रहे धूप में...

हां मैंने देखा है फरिश्ता अपने पिता के रूप में ।।

Added by Sakshi garg on October 10, 2020 at 9:02pm — No Comments

हम ही चले जाते हैं !

Added by Jasmine Singh on October 9, 2020 at 1:04am — No Comments

भ्रम

बड़ा गुरूर था हमें अपनी मोहब्बत पर
भ्रम तो तब टूटा जब तेरे वजूद में
अपने लिए जगह भी न मिली
सोचा था तेरे दिल में जगह बना ली है
हकीकत तो तेरी यादों में भी ना थे हम
बड़े बड़े तूफ़ान ना हिला सके हमें
तेरी ख़ामोशी ने झकझोर दिया
उम्मीद न रही तेरे प्यार की जब
लगा जैसे अपनों ने ही मुंह मोड़ लिया
जी रहे थे जिंदगी किसी भ्रम में हम
अब तो उस भ्रम ने भी साथ छोड़ दिया

Added by Monica Sharma on October 5, 2020 at 11:27pm — No Comments

मुझे दुख है !

Added by Jasmine Singh on October 3, 2020 at 12:41am — No Comments

मेरा मन

जाने क्यूं ऐसा व्याकुल और व्यथित है मेरा मन

तेरी ख़ामोश सी निग़ाहों को पढ़ना अब हो गया कठिन

एक दौर था जब हम बिन कहे समझ जाते थे

तेरे मन की हर बात को अपनी आंखों से समझाते थे

मेरे मन के समंदर में गोते लगाती है भावनाएं

शायद तेरे दिल के अक्स पर मेरा प्रतिबिंब बन जाए

प्रेम, प्यार और तृष्णा का बुन गया है ताना बाना

भाव नदी में बह गया मन अब हाथ ना कुछ भी आना

सोचा मन पर संयम रख लूं कर्तव्य सभी मैं पूरे कर लूं

पर जैसे नदी की धारा पर चलता नही है…

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Added by Monica Sharma on October 1, 2020 at 11:42pm — No Comments

अपनों की दास्तां

कुछ अपने हैं जो मुझसे बिलकुल बे-खबर है ,
और मेरे हालात से कुछ गैर हर दम बा-खबर है...

Added by Habib Rehman(mere_ankahe_alfaaz) on September 29, 2020 at 2:42pm — No Comments

बेटियां

Added by Jasmine Singh on September 28, 2020 at 8:39am — No Comments

शादी क्या हुई !!

Added by Jasmine Singh on September 26, 2020 at 11:27pm — No Comments

The two universes unites

Added by Sakshi garg on September 26, 2020 at 8:47pm — No Comments

मां

मेरी ख़ामोश सी निग़ाहों को

बिन कहे पढ़ लेती है

मेरी भूल को छुपाने को

दुनिया से लड़ लेती है

जो वजूद है मेरा,उसका कहना ही क्या

भगवान से भी पहले, आती है मेरी मां

कितने राज़ थे मेरे

जो दुनिया से छुपाए बैठी है

अपनी पलकों में आंसू

मोती से सजाएं बैठी है

मेरी छोटी सी उफ़ पर

रातों को भूल जाती थी

सिराहने बैठ मेरे प्यार से

सिर को सहलाती थी

टुकड़े हाथों से तोड़ कर

जब मुझे खिलाती थी

खाता देख मुझे उसको

तृप्ति मिल जाती…

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Added by Monica Sharma on September 25, 2020 at 11:45pm — No Comments

मेरा प्यार मुझसे रूठ गया

एक तारा अंबर से टूट सा गया

मेरा प्यार मुझसे रूठ सा गया

जाने किस बात पर की अनबन

तोड़ लिया रिश्ता जैसे टूटे दर्पण

कहा था तुमने कभी तुम छाता हो मेरा

संभालू ठीक से तो उम्र भर रहेगा मेरा

बदलकर आज वो मुझे लूट सा गया

मेरा प्यार मुझसे रूठ सा गया

मनाया लाख पर उसने कहां मानी

मेरे प्यार को समझा कोई झूठी कहानी

हज़ारों बार मैंने उसे फ़रियाद भेजी

पर वक़्त की कमी में उसने न देखी

संग चलने का वादा था वो टूट सा गया

मेरा प्यार मुझसे रूठ सा…

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Added by Monica Sharma on September 22, 2020 at 7:25pm — No Comments

एक तरफा प्यार

कभी कभी लगता है कि तुमसे मेरा प्यार आज भी एक तरफा ही है ।

तुम्हारी एक झलक के लिए मै हर पल उतावली हूं, 

तुम भी देखो मुझे प्यार से इसी की मैं प्यासी हूं, 

पर तुम देखते ही नहीं मुझे उस तरह, 

जिस तरह मै देखती हूं तुम्हे हर दफा, 

शायद किस्मत मुझसे खफा ही है... 

कभी कभी लगता है कि तुमसे मेरा प्यार आज भी एक तरफा ही है ।।

Added by Sakshi garg on September 21, 2020 at 5:21pm — No Comments

जो रातें अकसर जागती हूँ तेरी यादों में उनका कहीं बहीखाता होगा क्या ..Ra$hi

जो रातें अकसर जागती हूँ तेरी यादों में उनका कहीं बहीखाता होगा क्या ..Ra$hi

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Added by Rashmi on September 19, 2020 at 9:44pm — No Comments

मेरे पतिदेव

लाखों की भीड़ में सबसे जुदा

मानो न मानो वो है मेरा खुदा

दिल में न उसके है कोई फरेब

ऐसे प्यारे से है मेरे पतिदेव

हर जिम्मेदारी को हंस कर निभाना

हो मुश्किल कभी तो लगे गाने गाना

ढूंढ न सकोगे उनमें कोई भी एब

ऐसे प्यारे से है मेरे पतिदेव

चाहत कभी वो जताते नही

मीठी- मीठी बातें कभी वो बनाते नही

सातों जन्म न मिले तो होगा मुझे खेद

ऐसे प्यारे से है मेरे पतिदेव

तेरा गुस्सा और नखरा सब सह जाऊंगी

बहती आंखों से बाते सब कह जाऊंगी

तेरी…

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Added by Monica Sharma on September 18, 2020 at 8:14pm — No Comments

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શું? આ છે જિંદગી !

Posted by Sonu on October 15, 2020 at 7:36pm 0 Comments

મૃગ તરસે જળ દોડી દોડી હાથધર્યું ઝાંઝવાનીર, માનવ ભૂખ્યો પ્રેમનો મથામણ કરી પામ્યો વહેમ 

શું? આ છે જિંદગી !

રોણુ જન્મ ને મરણ સમયે સમાન મનોવ્યથા, આંતરીક ગુપશુપ ચાલી રહી ભીતર

શુ ? આ છે જિંદગી !

રાજકુમારો ને મહેલોના સપનામાં  રાચતા, આંખો ખુલી અરે ! આતો મૃગજળસમું સ્વપ્નલોક

શુ? આ છે જિંદગી !

મુખપર હસી ઠીઠોલી, મનમાં કરોડો તરંગ ઉછળે! વિચારે તો જાણે ઘેરો ઘાલ્યો

શુ? આ છે જિંદગી !

ભોરથતા આશબંધણીકાલે નહીતો આજે, હશે પિયુ સંગ સ્નેહમિલન પણ આતો…

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तुझको लिखती रहूंगी मैं !

Posted by Jasmine Singh on October 15, 2020 at 1:22am 0 Comments

तुझे लिखती रहूंगी मैं

तेरे प्यार की स्याही में

अपनी कलम को डुबो कर

इस ज़िंदगी के पन्नों पे

तेरे साथ जिये लम्हों को

कविताओं में बुनकर

तुझको लिखती रहूंगी मैं

तुझको जीती रहूंगी मैं

तू वो है जो मेरे साथ है

और मेरे बाद भी रहेगा

कभी किसी के होठों में हंसेगा

किसी की आंखों से बहेगा

किसी अलमारी के पुराने

दराज की खुशबु में महकेगा

किसी की आंखों की गहराई

जब जब मेरे शब्दों में उतरेगी

तब तब मेरे बाद तुझे पढ़ने वालों के…

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इल्ज़ाम ए इश्क़

Posted by Monica Sharma on October 14, 2020 at 9:12pm 0 Comments

धीरे-धीरे सब दूर होते गए

वक़्त के आगे मजबूर होते गए

रिश्तों में हमने ऐसी चोट खाई की

बस हम बेवफ़ा और सब बेकसूर होते गए

इल्ज़ामों की श्रृंखला बड़ी लंबी थी साहेब

वो लगाते गए हम मुस्कुराते गए

अपनी झुकी हुई भीगी पलकों के नीचे

जख्म ए इश्क़ हम छुपाते चले गए

बरसों किया इंतजार हमने

तेरी मीठी सी मुस्कान का

पर बेरहम तुम नजरों से

कत्ल करने को खंजर चलाते गए

जिक्र ए इश्क़ जो कभी सुनाई दे

जुबां पे तेरा नाम और

नज़रों में तेरा अक्स दिखाई…

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आसमान से ऊंचा

Posted by Sakshi garg on October 14, 2020 at 10:16am 1 Comment

अक्सर सिर की छत बन कर धूप और बारिश से बचा लेता है पिता...

यूं ही नहीं उसे आसमान से भी ऊंचा कहते ।

दो बातें

Posted by Sakshi garg on October 14, 2020 at 10:13am 0 Comments

कुछ बातें इन दो कारणों से भी तकलीफ दे देती हैं : 

1• काश ! ये सब सच होता ।;

2• काश ! ये सब झूठ होता ।

पिता

Posted by Sakshi garg on October 10, 2020 at 9:02pm 0 Comments

मुझे रखा छांव में, खुद जलते रहे धूप में...

हां मैंने देखा है फरिश्ता अपने पिता के रूप में ।।

भ्रम

Posted by Monica Sharma on October 5, 2020 at 11:27pm 0 Comments

बड़ा गुरूर था हमें अपनी मोहब्बत पर
भ्रम तो तब टूटा जब तेरे वजूद में
अपने लिए जगह भी न मिली
सोचा था तेरे दिल में जगह बना ली है
हकीकत तो तेरी यादों में भी ना थे हम
बड़े बड़े तूफ़ान ना हिला सके हमें
तेरी ख़ामोशी ने झकझोर दिया
उम्मीद न रही तेरे प्यार की जब
लगा जैसे अपनों ने ही मुंह मोड़ लिया
जी रहे थे जिंदगी किसी भ्रम में हम
अब तो उस भ्रम ने भी साथ छोड़ दिया

मुझे दुख है !

Posted by Jasmine Singh on October 3, 2020 at 12:41am 0 Comments

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