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Comment by Om Prakash Nautiyal on December 23, 2016 at 8:08pm

O. P.Nautiyal

M.Sc (Phy.) ,M.Sc.(Maths), MBA

FIETE, SM-CSI, M-ISTD, SM-IEEE, SM-EMS:EX. General Manager (ONGC)

EX. Chairman ,IETE ,Vadodara:EX. Chairman, CSI  , Dehra Dun

संप्रति - साहित्य सेवा , शिक्षण एवं परामर्श:

प्रकाशित पुस्तकें -साँस साँस जीवन ,पावन धार गंगा है ,पीपल बिछोह में            शीघ्र प्रकाश्य : दुक्के , चौके:

साझा काव्य संग्रह  : त्रिसुगंधि ,अंजुरी, तेरी यादें, काव्यमाला, दोहा कलश  आदि


RES: 301, Maruti Flats, Gaekwad Compound, Opp.ONGC, Makarpura Road , Vadodara , Gujarat -390009

Ph.0265-2635266 :  Mob:9427345810 :  E-mail:   ompnautiyal@yahoo.com :    Blog: www.opnautiyal.blogspot.in

 

 

संक्षिप्त परिचय

ओंम प्रकाश नौटियाल

            संप्रति - साहित्य सेवा , शिक्षण , परामर्श एवं समाज सेवा

            साहित्य सेवा: लगभग 600 कविताएं : विभिन्न विषयों पर अनेकों लेख,कहानी आदि : राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित      

            प्रकाशित पुस्तकें -साँस साँस जीवन (काव्य संग्रह ) , पावन धार गंगा है ( काव्य संग्रह ) ,पीपल बिछोह में ( काव्य संग्रह )

            शीघ्र प्रकाश्य : दुक्के, चौके, छक्के

            संयुक्त संकलन : त्रिसुगंधि ( काव्य संग्रह ) : अंजुरी (काव्य संग्रह ): तेरी यादें : काव्यमाल, दोहा कलश  आदि ।

 

            ओ.ऐन.जी.सी से महाप्रबंधक (इलैक्ट्रोनिक्स एवं कम्यूनिकेशन्स) के पद से सेवा निवृत होने के बाद  परामर्श, शिक्षण , साहित्य एवं समाज में समर्पित हूं। छः सौ से अधिक  कवितायें लिखी हैं । कविताएं तथा विभिन्न विषयों पर अनेक लेख कहानियाँ आदि प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते है। मूलतः उत्तराखण्ड वासी हूं किंतु बडौदा से सेवा निवृत होने के पश्चात फिलहाल यहीं निवास है।

 

पता 301, मारुति फ्लैट्स, गायकवाड कम्पाउन्ड

ओ.ऐन.जी.सी के सामने, मकरपुरा रोड, वडोदरा ,गुजरात-390009

दूरभाष .0265-2635266 :  मो.:9427345810 :

E-mail:   ompnautiyal@yahoo.com :   

            Blog: www.opnautiyal.blogspot.in

Blog Posts

Let me kiss you !

Posted by Jasmine Singh on April 17, 2021 at 2:07am 0 Comments

वो जो हँसते हुए दिखते है न लोग अक्सर वो कुछ तन्हा से होते है पराये अहसासों को लफ़्ज देतें है खुद के दर्द पर खामोश रहते है जो पोछतें दूसरे के आँसू अक्सर खुद अँधेरे में तकिये को भिगोते है वो जो हँसते…

Posted by Pooja Yadav shawak on March 24, 2021 at 1:54pm 0 Comments

वो जो हँसते हुए दिखते है न लोग
अक्सर वो कुछ तन्हा से होते है
पराये अहसासों को लफ़्ज देतें है
खुद के दर्द पर खामोश रहते है
जो पोछतें दूसरे के आँसू अक्सर
खुद अँधेरे में तकिये को भिगोते है
वो जो हँसते हुए दिखते है लोग
अक्सर वो कुछ तन्हा से होते है

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मेरी जिंदगी

Posted by Monica Sharma on March 23, 2021 at 11:54am 0 Comments

पंच तत्व

Posted by Sakshi garg on February 16, 2021 at 11:18pm 0 Comments

जब मुझे पता चला कि तुम पानी हो
तो मै भीग गया सिर से पांव तक ।

जब मुझे पता चला कि तुम हवा की सुगंध हो
तो मैंने एक श्वास में समेट लिया तुम्हे अपने भीतर।

जब मुझे पता चला कि तुम मिट्टी हो
तो मै जड़ें बनकर समा गया तुम्हारी आर्द्र गहराइयों में।

जब मुझे मालूम हुआ कि तुम आकाश हो
तो मै फैल गया शून्य बनकर।

अब मुझे बताया जा रहा है कि तुम आग भी हो•••
तो मैंने खूद को बचा कर रख है तुम्हारे लिए।

तुम !

Posted by Jasmine Singh on February 16, 2021 at 7:23pm 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 30, 2021 at 10:38am 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 29, 2021 at 6:07pm 0 Comments

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