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Hindi Literature

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Latest Activity: Aug 17, 2020

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"Khamoshi"

Started by Utsav Patel. Last reply by Jagrut dabir Jul 11, 2013. 1 Reply

Thodi sone si dhoop hai...Thodi chandi si chandni....Thoda gam tumhe bhi hai...Thoda mujhe bhi...Thodi bebasi hai...Aankhe teri bhi nam hai....Meri bhi...Chal aaj fir ithlate hai....Muskurate…Continue

|| क्या यह ब्रह्माण्ड मैत्रीपूर्ण है! ||

Started by Prahlad Joshi Apr 30, 2013. 0 Replies

बहन वृंदाने मुझसे एक सत्यघटना सुनकर  लिखी हुयी एक कथा.============================================पापा, What is your answer to the question "Is the universe a friendly place?" एलिसने पितासे पूछा.…Continue

|| मतवाले मंगलको सलाम ||

Started by Prahlad Joshi Apr 30, 2013. 0 Replies

एक बार मैं अपने कम्प्युटरसे बज रहे एक गानेके साथ बड़े आनंद और प्रेमसे साथ साथ गा रहा था, तब मेरे एक मेहमान, मेरे मित्र, श्री रतिलाल जोषी, गुमसुन्न हो गए. यह एक अचरजकी बात थी, क्योंकि एक संगीत रसिक…Continue

तो कलम चलती है….

Started by radhika patel. Last reply by radhika patel Mar 8, 2013. 4 Replies

लब्ज़ोको मुह में दबाकर,जब मौन के कोड़े मारता है कोई -तो कलम चलती है….वख्तको बोतलमे बंध करके,खोमोशीयो के विराने मे छोड़ आता है कोई -तो कलम चलती है…..दुनिया जिसने देखी भी नहीं, ऐसे गर्भको दफ़ना दिया…Continue

Tags: jo, anil

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Comment by Facestorys.com Admin on March 13, 2013 at 10:41am

 

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इस बात से डर लगता है

Posted by Monica Sharma on January 24, 2021 at 11:02pm 0 Comments

रूठ जाने को दिल चाहता है

पर मनाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

आंखों से बहते है झरने से आंसू

तुम हंसाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

कहते हो मुझ में खूबी बहुत है

गले से लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

इंतज़ार पर तेरे तो हक़ है मेरा

पर इस राह से आओगे या नही

इस बात से डर लगता है

ज़ख़्म इतने है के दिखा ना सके

मरहम लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

तेरे लिए मौत को भी गले लगा ले

आखिरी पल देखने आओगे या नही

इस…

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प्यार का रिश्ता

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:50pm 0 Comments

शानदार रिश्ते चाहिए

तो उन्हें गहराई से निभाएं

भूल होती है सभी से

पर अपनों के ज़ख्मों पर मरहम लगाए

तेरी मीठी सी मुस्कान

दवा सा असर दिखाती है

कंधे पर रख कर सिर

जब तू मुझे समझाती है

ग़म की गहरी काली रात भी

खुशनुमा सुबहों में बदल जाती है

मैं साथ हूं तेरे ये बात जब तू दोहराती है

मिस्री सी जैसे मेरे कानों में घुल जाती है

सुनो। कह कर जब बहाने से तू मुझे बुलाती है

मेरे" जी" कहने पर फिर आंखों से शर्माती है

बिन कहे तू जब इतना प्यार…

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मेरा सच

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:30pm 0 Comments

जवाब दे सको शायद

ये तेरे लिए मुमकिन ही नही

मगर इंतजार पर आपके

बस हक़ है मेरा

बिन कहे तेरी आंखों को पढ़

ले जिस दिन

समझो इश्क़ मुकमिल हुआ मेरा उस दिन

हसरत है तेरी ज़रूरत नहीं ख्वाहिश बन जाएं

जिद है मेरी हर सांस पे तेरा नाम आए

जिस दिन देख मेरी आंखों की नमी

तुझे महसूस हो जाएं कहीं मेरी कमी

मेरे सवाल तुमसे जुड़ने का बहाना है

वरना हमें भीड़ में भी नही ठिकाना है

जीते है तुझे खुश करने को हम

तेरे आंगन में खुशियों के रंग भरने को…

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एक सच

Posted by Monica Sharma on December 4, 2020 at 2:12pm 0 Comments

तुम से लड़ते हैं के मेरे
लिए "ख़ास" हो तुम ।
अपने ना होते तो"हार"
कर जाने देते तुम्हें ।
हक़ जताते है तुम पर
क्युकिं
हक़ दिया है तुमने
बेवजह तो इजाज़त"अश्कों"
को भी नही देते हुए हम

मोनिका शर्मा

ज़िंदगी ......!

Posted by Jasmine Singh on December 2, 2020 at 11:02pm 0 Comments

ज़िंदगी एक अंधेरे बंद कमरे सी लगने लगी है !

यहां से बाहर जाने का दरवाज़ा तो है,

पर पता नहीं किस तरफ कितनी दूर,

और उसकी चाबी का भी कुछ पता नहीं !

वो भी मेरी तरह इस अंधेरे में गुम पड़ी है कहीं !

रोशनी का एक कतरा भी अंदर आ पाता नहीं !

इसलिए वक़्त का कुछ अंदाज़ा हो पाता नहीं !

कायम रहता है तो बस अंधेरा बस खामोशी ,

और मेरी हर पल तेज होती धड़कन ,

जैसे जैसे धड़कन बढ़ती है ये घबराहट भी और बढ़ती है,

और ये अंधेरा जैसे और काला हुआ जाता है ,

जैसे…

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तुझको लिखती रहूंगी मैं, तुझको जीती रहूंगी मैं !

Posted by Jasmine Singh on December 2, 2020 at 9:41am 0 Comments

तुझे लिखती रहूंगी मैं

तेरे प्यार की स्याही में

अपनी कलम को डुबो कर

इस ज़िंदगी के पन्नों पे

तेरे साथ जिये लम्हों को

कविताओं में बुनकर

तुझको लिखती रहूंगी मैं

तुझको जीती रहूंगी मैं

तू वो है जो मेरे साथ है

और मेरे बाद भी रहेगा

कभी किसी के होठों में हंसेगा

किसी की आंखों से बहेगा

किसी अलमारी के पुराने

दराज की खुशबु में महकेगा

किसी की आंखों की गहराई

जब जब मेरे शब्दों में उतरेगी

तब तब मेरे बाद तुझे पढ़ने वालों के…

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Distance

Posted by Jasmine Singh on November 28, 2020 at 10:36pm 0 Comments

Your absence always silenced the distance
Perhaps it was your presence in the distance
I wonder how will I cover this distance
May be this distance is not the distance
Actually responsibilities are the distance
One day we will swim across this distance
We will float on love and mock this distance
Hail and hearty we stay away from the distance
I pray no one gets to experience the distance
©Reserved by Jasmine Singh

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