Aarti Sanjay Bhagat
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First Language
Hindi, Marathi
Second Language
Marathi
Interests
Reading, writing.

Aarti Sanjay Bhagat's Blog

चाँद

Posted on August 28, 2020 at 9:50am 1 Comment

धुँधले निशां..

Posted on August 19, 2020 at 7:37pm 1 Comment

धुँधले हो गये है कुछ निशां मेरे बदन पर
ज़रा दोबारा सें वो निशां दे जाओ ना

रह गये है अधुरे कुछ किस्से लबों पर
ईक मुलाकात कर मुकम्मल कर जाओ ना

शुष्क हो गयी है रूह मेरी
तुम मोहब्बत की नमी दे जाओ ना ||

- रती ♥️

झुमके..♥️

Posted on August 18, 2020 at 6:30pm 1 Comment

सुनो..

हा माना मैं हमेशा रूठ जाया करती हूं

हर छोटी बातों पर

क्योकीं मुझे मनाने के लिए तुम

मेरे लिए कानों के झुमके ले आया करते हो,

अब ये मत कहना

झुमको के लिए रूठती हूं,



वो झुमका अपने हाथों से मेरे कानों में पहना कर

फिर जब तुम उन झुमकों के थोड़ा सा नीचे की तरफ़ झुककर अपने होंठों को रखते हो गर्दन पर मेरे और मुझे मनाने की कोशिश करते हो ना,



ये मुझे मनाने का आपका अंदाज मुझे बहुत पसंद हैं और मैं बस इसी के लिए तुमसे रूठ जाया करती हूं… Continue

तुम्हारा इत्र.. ❤️

Posted on August 16, 2020 at 9:21am 0 Comments

सुनो, ❤️
तुम हमेशा पुछते हों ना,
मैं रोज रात तुम्हारी ही कमीज़ क्यूँ पहनती हूं,

तुम्हारी कमीज़ से मेरा इतना लगाव क्यूं
क्या मिलता हैं मुझे तुम्हारी कमीज़ में
और मैं तुमसे लिपटकर तुम्हारे सीने पर उंगलीयो सें नक्षी बुनतें हुए टाल देती हू जवाब..

कमीज़ में मिलते हो तुम..
कमीज़ में हैं तुम्हारे जिस्म की खुशबू
जों मेरे जिस्म सें घुल कर मुझे सम्पूर्ण करती हैं
क्योकीं मुझे मुझमे तुम्हारा इत्र पसंद हैं |

- रती ❤️

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Blog Posts

पंच तत्व

Posted by Sakshi garg on February 16, 2021 at 11:18pm 0 Comments

जब मुझे पता चला कि तुम पानी हो
तो मै भीग गया सिर से पांव तक ।

जब मुझे पता चला कि तुम हवा की सुगंध हो
तो मैंने एक श्वास में समेट लिया तुम्हे अपने भीतर।

जब मुझे पता चला कि तुम मिट्टी हो
तो मै जड़ें बनकर समा गया तुम्हारी आर्द्र गहराइयों में।

जब मुझे मालूम हुआ कि तुम आकाश हो
तो मै फैल गया शून्य बनकर।

अब मुझे बताया जा रहा है कि तुम आग भी हो•••
तो मैंने खूद को बचा कर रख है तुम्हारे लिए।

तुम !

Posted by Jasmine Singh on February 16, 2021 at 7:23pm 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 30, 2021 at 10:38am 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 29, 2021 at 6:07pm 0 Comments

इस बात से डर लगता है

Posted by Monica Sharma on January 24, 2021 at 11:02pm 0 Comments

रूठ जाने को दिल चाहता है

पर मनाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

आंखों से बहते है झरने से आंसू

तुम हंसाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

कहते हो मुझ में खूबी बहुत है

गले से लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

इंतज़ार पर तेरे तो हक़ है मेरा

पर इस राह से आओगे या नही

इस बात से डर लगता है

ज़ख़्म इतने है के दिखा ना सके

मरहम लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

तेरे लिए मौत को भी गले लगा ले

आखिरी पल देखने आओगे या नही

इस…

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प्यार का रिश्ता

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:50pm 0 Comments

शानदार रिश्ते चाहिए

तो उन्हें गहराई से निभाएं

भूल होती है सभी से

पर अपनों के ज़ख्मों पर मरहम लगाए

तेरी मीठी सी मुस्कान

दवा सा असर दिखाती है

कंधे पर रख कर सिर

जब तू मुझे समझाती है

ग़म की गहरी काली रात भी

खुशनुमा सुबहों में बदल जाती है

मैं साथ हूं तेरे ये बात जब तू दोहराती है

मिस्री सी जैसे मेरे कानों में घुल जाती है

सुनो। कह कर जब बहाने से तू मुझे बुलाती है

मेरे" जी" कहने पर फिर आंखों से शर्माती है

बिन कहे तू जब इतना प्यार…

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मेरा सच

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:30pm 0 Comments

जवाब दे सको शायद

ये तेरे लिए मुमकिन ही नही

मगर इंतजार पर आपके

बस हक़ है मेरा

बिन कहे तेरी आंखों को पढ़

ले जिस दिन

समझो इश्क़ मुकमिल हुआ मेरा उस दिन

हसरत है तेरी ज़रूरत नहीं ख्वाहिश बन जाएं

जिद है मेरी हर सांस पे तेरा नाम आए

जिस दिन देख मेरी आंखों की नमी

तुझे महसूस हो जाएं कहीं मेरी कमी

मेरे सवाल तुमसे जुड़ने का बहाना है

वरना हमें भीड़ में भी नही ठिकाना है

जीते है तुझे खुश करने को हम

तेरे आंगन में खुशियों के रंग भरने को…

Continue

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