Sakshii Subhash Tiwari
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English, Hindi, Marathi
Second Language
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Writing poems

Sakshii Subhash Tiwari's Blog

पहले जैसी बात नहीं

Posted on September 4, 2020 at 8:26pm 0 Comments

झील सी शांत हो गई है,
अब सताती ही नहीं..
सच कहते है साहब,
जिंदगी में अब वो
पहले जैसी बात नहीं..!

उम्र

Posted on September 4, 2020 at 8:25pm 0 Comments

उम्र के इस हसीन शाम में
चांदी उगने लगी है बालों में,
चेहरे की दीवारें अब रंग छोड़ने लगी है..
झुर्रियों की दरारों से झाकते है तजुर्बे
देखने ढंग इस नई लगती पुरानी दुनिया के,
फिर से बच्चा बना ये दिल
निहारता है आसमान छूते उसके बच्चो को...
बस आंखो में सजा लेने दे ये उड़ाने इनकी
जरा ठहर जा ए जिंदगी..
तुझे गुजरने की इतनी जल्दी भी क्या है..

बातें दीवारों से

Posted on September 1, 2020 at 12:43am 0 Comments

थक चुके है ये,
सहमे से रहकर...
अपनो की तलाश छोड़,
मेरे अंदर के सन्नाटे अब
दीवारों से बाते करते है..

मिल्कियत

Posted on August 28, 2020 at 12:08am 0 Comments

चांद जितनी चाहत है,
जुगनू जितनी हैसियत है मेरी...
ख्वाहिशों की दुनिया में,
बस अधूरे ख्वाब ही मिल्कियत है मेरी..

मिल्कियत= 'जागीर', ' जायदाद '

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At 11:13pm on August 19, 2020, Sakshii Subhash Tiwari said…
उम्र के इस हसीन शाम में
चांदी उगने लगी है बालों में,
चेहरे की दीवारें अब रंग छोड़ने लगी है..
झुर्रियों की दरारों से झाकते है तजुर्बे
देखने ढंग इस नई लगती पुरानी दुनिया के,
फिर से बच्चा बना ये दिल
निहारता है आसमान छूते उसके बच्चो को...
बस आंखो में सजा लेने दे ये उड़ाने इनकी
जरा ठहर जा ए जिंदगी..
तुझे गुजरने की इतनी जल्दी भी क्या है..
 
 
 

Blog Posts

Let me kiss you !

Posted by Jasmine Singh on April 17, 2021 at 2:07am 0 Comments

वो जो हँसते हुए दिखते है न लोग अक्सर वो कुछ तन्हा से होते है पराये अहसासों को लफ़्ज देतें है खुद के दर्द पर खामोश रहते है जो पोछतें दूसरे के आँसू अक्सर खुद अँधेरे में तकिये को भिगोते है वो जो हँसते…

Posted by Pooja Yadav shawak on March 24, 2021 at 1:54pm 0 Comments

वो जो हँसते हुए दिखते है न लोग
अक्सर वो कुछ तन्हा से होते है
पराये अहसासों को लफ़्ज देतें है
खुद के दर्द पर खामोश रहते है
जो पोछतें दूसरे के आँसू अक्सर
खुद अँधेरे में तकिये को भिगोते है
वो जो हँसते हुए दिखते है लोग
अक्सर वो कुछ तन्हा से होते है

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मेरी जिंदगी

Posted by Monica Sharma on March 23, 2021 at 11:54am 0 Comments

पंच तत्व

Posted by Sakshi garg on February 16, 2021 at 11:18pm 0 Comments

जब मुझे पता चला कि तुम पानी हो
तो मै भीग गया सिर से पांव तक ।

जब मुझे पता चला कि तुम हवा की सुगंध हो
तो मैंने एक श्वास में समेट लिया तुम्हे अपने भीतर।

जब मुझे पता चला कि तुम मिट्टी हो
तो मै जड़ें बनकर समा गया तुम्हारी आर्द्र गहराइयों में।

जब मुझे मालूम हुआ कि तुम आकाश हो
तो मै फैल गया शून्य बनकर।

अब मुझे बताया जा रहा है कि तुम आग भी हो•••
तो मैंने खूद को बचा कर रख है तुम्हारे लिए।

तुम !

Posted by Jasmine Singh on February 16, 2021 at 7:23pm 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 30, 2021 at 10:38am 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 29, 2021 at 6:07pm 0 Comments

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