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रुई की चादार पर सपने सुलाए थे बारिश आकर उन्हे किसी और की नींदो में बारसा गई!! @jhanvi sareen

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बड़ी ख्वाइशें नहीं छोटे सपने ही काफी हैचांद छुप गया , तारे तो बाकी हैख्वाबों के दराज को खोलके देखोरौशनी से चमकते सपनों का बसेरा हैपर उस रास्ते में कई पहरेदारों का डेरा हैमेहनत और सबर से ही मिलना सवेर…

बड़ी ख्वाइशें नहीं छोटे सपने ही काफी हैचांद छुप गया , तारे तो बाकी हैख्वाबों के दराज को खोलके देखोरौशनी से चमकते सपनों का बसेरा हैपर उस रास्ते में कई पहरेदारों का डेरा हैमेहनत और सबर से ही मिलना सवेरा है बंद दराज के अंदर तो सिर्फ अधेरा है!!@Jhanvi sareenSee More
Aug 27, 2020
Geeta Negi liked Jhanvi Sareen's blog post अधूरी ज़िन्दगानी
Aug 25, 2020

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रुई की चादार पर सपने सुलाए थे बारिश आकर उन्हे किसी और की नींदो में बारसा गई!! @jhanvi sareen

Posted on August 31, 2020 at 4:17pm 0 Comments

रुई की चादार पर सपने सुलाए थे
बारिश आकर उन्हे किसी और की नींदो में बारसा गई!!

@jhanvi sareen

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बड़ी ख्वाइशें नहीं छोटे सपने ही काफी हैचांद छुप गया , तारे तो बाकी हैख्वाबों के दराज को खोलके देखोरौशनी से चमकते सपनों का बसेरा हैपर उस रास्ते में कई पहरेदारों का डेरा हैमेहनत और सबर से ही मिलना सवेर…

Posted on August 27, 2020 at 6:22pm 0 Comments

बड़ी ख्वाइशें नहीं छोटे सपने ही काफी है
चांद छुप गया , तारे तो बाकी है
ख्वाबों के दराज को खोलके देखो
रौशनी से चमकते सपनों का बसेरा है
पर उस रास्ते में कई पहरेदारों का डेरा है
मेहनत और सबर से ही मिलना सवेरा है
बंद दराज के अंदर तो सिर्फ अधेरा है!!

@Jhanvi sareen

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अधूरी ज़िन्दगानी

Posted on August 25, 2020 at 9:23am 1 Comment

आज एक हकीकत से वाकिफ हुई
एक सोच मेरे अंदर दाख़िल हुई
हर हिदायत पेश नहीं की जाती
हर तकलीफ़ बयां नहीं हो सकती
हर कोशिश कामियाब नहीं होती
हर सफ़र की मंज़िल नहीं होती
हर रात की सुबह नहीं होती।
लेकीन शायद अधूरे में ही मज़ा है
क्यूंकि पुरी हुई तो कहानी है
अधूरी है तभी तो ज़िन्दगानी है!!!

@Jhanvi sareen

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At 4:13pm on August 25, 2020, Jasmine Singh said…

Welcome sweetheart ❤️

 
 
 

Blog Posts

इस बात से डर लगता है

Posted by Monica Sharma on January 24, 2021 at 11:02pm 0 Comments

रूठ जाने को दिल चाहता है

पर मनाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

आंखों से बहते है झरने से आंसू

तुम हंसाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

कहते हो मुझ में खूबी बहुत है

गले से लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

इंतज़ार पर तेरे तो हक़ है मेरा

पर इस राह से आओगे या नही

इस बात से डर लगता है

ज़ख़्म इतने है के दिखा ना सके

मरहम लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

तेरे लिए मौत को भी गले लगा ले

आखिरी पल देखने आओगे या नही

इस…

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प्यार का रिश्ता

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:50pm 0 Comments

शानदार रिश्ते चाहिए

तो उन्हें गहराई से निभाएं

भूल होती है सभी से

पर अपनों के ज़ख्मों पर मरहम लगाए

तेरी मीठी सी मुस्कान

दवा सा असर दिखाती है

कंधे पर रख कर सिर

जब तू मुझे समझाती है

ग़म की गहरी काली रात भी

खुशनुमा सुबहों में बदल जाती है

मैं साथ हूं तेरे ये बात जब तू दोहराती है

मिस्री सी जैसे मेरे कानों में घुल जाती है

सुनो। कह कर जब बहाने से तू मुझे बुलाती है

मेरे" जी" कहने पर फिर आंखों से शर्माती है

बिन कहे तू जब इतना प्यार…

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मेरा सच

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:30pm 0 Comments

जवाब दे सको शायद

ये तेरे लिए मुमकिन ही नही

मगर इंतजार पर आपके

बस हक़ है मेरा

बिन कहे तेरी आंखों को पढ़

ले जिस दिन

समझो इश्क़ मुकमिल हुआ मेरा उस दिन

हसरत है तेरी ज़रूरत नहीं ख्वाहिश बन जाएं

जिद है मेरी हर सांस पे तेरा नाम आए

जिस दिन देख मेरी आंखों की नमी

तुझे महसूस हो जाएं कहीं मेरी कमी

मेरे सवाल तुमसे जुड़ने का बहाना है

वरना हमें भीड़ में भी नही ठिकाना है

जीते है तुझे खुश करने को हम

तेरे आंगन में खुशियों के रंग भरने को…

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एक सच

Posted by Monica Sharma on December 4, 2020 at 2:12pm 0 Comments

तुम से लड़ते हैं के मेरे
लिए "ख़ास" हो तुम ।
अपने ना होते तो"हार"
कर जाने देते तुम्हें ।
हक़ जताते है तुम पर
क्युकिं
हक़ दिया है तुमने
बेवजह तो इजाज़त"अश्कों"
को भी नही देते हुए हम

मोनिका शर्मा

ज़िंदगी ......!

Posted by Jasmine Singh on December 2, 2020 at 11:02pm 0 Comments

ज़िंदगी एक अंधेरे बंद कमरे सी लगने लगी है !

यहां से बाहर जाने का दरवाज़ा तो है,

पर पता नहीं किस तरफ कितनी दूर,

और उसकी चाबी का भी कुछ पता नहीं !

वो भी मेरी तरह इस अंधेरे में गुम पड़ी है कहीं !

रोशनी का एक कतरा भी अंदर आ पाता नहीं !

इसलिए वक़्त का कुछ अंदाज़ा हो पाता नहीं !

कायम रहता है तो बस अंधेरा बस खामोशी ,

और मेरी हर पल तेज होती धड़कन ,

जैसे जैसे धड़कन बढ़ती है ये घबराहट भी और बढ़ती है,

और ये अंधेरा जैसे और काला हुआ जाता है ,

जैसे…

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तुझको लिखती रहूंगी मैं, तुझको जीती रहूंगी मैं !

Posted by Jasmine Singh on December 2, 2020 at 9:41am 0 Comments

तुझे लिखती रहूंगी मैं

तेरे प्यार की स्याही में

अपनी कलम को डुबो कर

इस ज़िंदगी के पन्नों पे

तेरे साथ जिये लम्हों को

कविताओं में बुनकर

तुझको लिखती रहूंगी मैं

तुझको जीती रहूंगी मैं

तू वो है जो मेरे साथ है

और मेरे बाद भी रहेगा

कभी किसी के होठों में हंसेगा

किसी की आंखों से बहेगा

किसी अलमारी के पुराने

दराज की खुशबु में महकेगा

किसी की आंखों की गहराई

जब जब मेरे शब्दों में उतरेगी

तब तब मेरे बाद तुझे पढ़ने वालों के…

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Distance

Posted by Jasmine Singh on November 28, 2020 at 10:36pm 0 Comments

Your absence always silenced the distance
Perhaps it was your presence in the distance
I wonder how will I cover this distance
May be this distance is not the distance
Actually responsibilities are the distance
One day we will swim across this distance
We will float on love and mock this distance
Hail and hearty we stay away from the distance
I pray no one gets to experience the distance
©Reserved by Jasmine Singh

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