नेहा पाठक
  • जयपुर
  • India
Share
 

नेहा पाठक's Page

Latest Activity

Jasmine Singh liked नेहा पाठक's blog post #स्वीकार्यता
Sep 1
Sanket Joshi liked नेहा पाठक's blog post #स्वीकार्यता
Aug 31
Jasmine Singh liked नेहा पाठक's blog post #स्वीकार्यता
Aug 31
Geeta Negi liked नेहा पाठक's blog post #स्वीकार्यता
Aug 31
Sakshi garg liked नेहा पाठक's blog post #स्वीकार्यता
Aug 31
नेहा पाठक posted blog posts
Aug 31
Jasmine Singh liked नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
Aug 30
कल्पना चौहान liked नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
Aug 30
कल्पना चौहान liked नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
Aug 30
कल्पना चौहान liked नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
Aug 30
कल्पना चौहान liked नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
Aug 30
कल्पना चौहान liked नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
Aug 30
Geeta Negi commented on नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
"Loved it!"
Aug 30
Geeta Negi liked नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
Aug 30
Geeta Negi liked नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
Aug 30
Sakshi garg liked नेहा पाठक's blog post हा में एक स्त्री हु ।
Aug 30

Profile Information

First Language
Hindi
Second Language
English
How did you come to know about us?
एक फेसबुक मित्र को मेरी पंक्तिया अच्छि लगी उन्होंने ।।आपके पेज का ये लिंक दिया हमको ।।
Interests
हिंदी लिखने में , ओर हिंदी को पढ़ने में ,
अच्छी पुस्तकें पढ़ना , अच्छे सास्कृतिक सांग सुन ना ।।

पुराने सांग भी ,

नेहा पाठक's Blog

#स्वीकार्यता

Posted on August 31, 2020 at 12:37pm 0 Comments

#स्व



में बातों को घुमाने में विश्वास नही करती जो मेरी नजर में सत्य है । में अक्सर उसके आगे ही खड़ी रहती हूं । चाहे परिस्थितिया कुछ भी हो , या लोगो के नजर में ये एक बेहूदगी हो या मेरी अड़ियलपंती , में अपनी बात से तनिक भी हिलती नही ।

हम एक सभ्य समाज में रहते है , ये एक किताबी बात लागती है मुझे , क्या सभ्य समाज जो आज हमारे आस पास है उसे सभ्य समाज कहते है तो में , तनिक भी इस बात में अपनी भागीदारी नही दूंगी , ये मेरी अपनी मानसिक मन्दता हो सकती है कि में सभ्य समाज को नही देख पा रही हु ,… Continue

हा में एक स्त्री हु ।

Posted on August 30, 2020 at 6:18pm 1 Comment

हा में एक स्त्री हु ।



तू कहे तो में दिग्विजय हो जाऊ ।।

गर छूले तो में एक नदी हो जाऊ।।

रूह में उतरु इस कदर की रुहानी हो जाऊ ।

पा लू संसार फिर भी खाली हो जाऊं।।



हा में स्त्री हु ।।



में किसी कवि की कविता , साहित्य का सार हो जाऊ,।

बालक का स्पर्श हो ,ओर में ममतामय माँ हो जाऊ।

प्रेममय आलिंगन ,हो में नारी हो जाऊं



हा में एक स्त्री हु ।।



में सूर्य की तपती किरण हो जाऊं

में कल्पना की तरह अंतरिक्ष मे खो जाऊ… Continue

Comment Wall

You need to be a member of Facestorys.com to add comments!

Join Facestorys.com

  • No comments yet!
 
 
 

Blog Posts

શું? આ છે જિંદગી !

Posted by Sonu on October 15, 2020 at 7:36pm 0 Comments

મૃગ તરસે જળ દોડી દોડી હાથધર્યું ઝાંઝવાનીર, માનવ ભૂખ્યો પ્રેમનો મથામણ કરી પામ્યો વહેમ 

શું? આ છે જિંદગી !

રોણુ જન્મ ને મરણ સમયે સમાન મનોવ્યથા, આંતરીક ગુપશુપ ચાલી રહી ભીતર

શુ ? આ છે જિંદગી !

રાજકુમારો ને મહેલોના સપનામાં  રાચતા, આંખો ખુલી અરે ! આતો મૃગજળસમું સ્વપ્નલોક

શુ? આ છે જિંદગી !

મુખપર હસી ઠીઠોલી, મનમાં કરોડો તરંગ ઉછળે! વિચારે તો જાણે ઘેરો ઘાલ્યો

શુ? આ છે જિંદગી !

ભોરથતા આશબંધણીકાલે નહીતો આજે, હશે પિયુ સંગ સ્નેહમિલન પણ આતો…

Continue

तुझको लिखती रहूंगी मैं !

Posted by Jasmine Singh on October 15, 2020 at 1:22am 0 Comments

तुझे लिखती रहूंगी मैं

तेरे प्यार की स्याही में

अपनी कलम को डुबो कर

इस ज़िंदगी के पन्नों पे

तेरे साथ जिये लम्हों को

कविताओं में बुनकर

तुझको लिखती रहूंगी मैं

तुझको जीती रहूंगी मैं

तू वो है जो मेरे साथ है

और मेरे बाद भी रहेगा

कभी किसी के होठों में हंसेगा

किसी की आंखों से बहेगा

किसी अलमारी के पुराने

दराज की खुशबु में महकेगा

किसी की आंखों की गहराई

जब जब मेरे शब्दों में उतरेगी

तब तब मेरे बाद तुझे पढ़ने वालों के…

Continue

इल्ज़ाम ए इश्क़

Posted by Monica Sharma on October 14, 2020 at 9:12pm 0 Comments

धीरे-धीरे सब दूर होते गए

वक़्त के आगे मजबूर होते गए

रिश्तों में हमने ऐसी चोट खाई की

बस हम बेवफ़ा और सब बेकसूर होते गए

इल्ज़ामों की श्रृंखला बड़ी लंबी थी साहेब

वो लगाते गए हम मुस्कुराते गए

अपनी झुकी हुई भीगी पलकों के नीचे

जख्म ए इश्क़ हम छुपाते चले गए

बरसों किया इंतजार हमने

तेरी मीठी सी मुस्कान का

पर बेरहम तुम नजरों से

कत्ल करने को खंजर चलाते गए

जिक्र ए इश्क़ जो कभी सुनाई दे

जुबां पे तेरा नाम और

नज़रों में तेरा अक्स दिखाई…

Continue

आसमान से ऊंचा

Posted by Sakshi garg on October 14, 2020 at 10:16am 1 Comment

अक्सर सिर की छत बन कर धूप और बारिश से बचा लेता है पिता...

यूं ही नहीं उसे आसमान से भी ऊंचा कहते ।

दो बातें

Posted by Sakshi garg on October 14, 2020 at 10:13am 0 Comments

कुछ बातें इन दो कारणों से भी तकलीफ दे देती हैं : 

1• काश ! ये सब सच होता ।;

2• काश ! ये सब झूठ होता ।

पिता

Posted by Sakshi garg on October 10, 2020 at 9:02pm 0 Comments

मुझे रखा छांव में, खुद जलते रहे धूप में...

हां मैंने देखा है फरिश्ता अपने पिता के रूप में ।।

भ्रम

Posted by Monica Sharma on October 5, 2020 at 11:27pm 0 Comments

बड़ा गुरूर था हमें अपनी मोहब्बत पर
भ्रम तो तब टूटा जब तेरे वजूद में
अपने लिए जगह भी न मिली
सोचा था तेरे दिल में जगह बना ली है
हकीकत तो तेरी यादों में भी ना थे हम
बड़े बड़े तूफ़ान ना हिला सके हमें
तेरी ख़ामोशी ने झकझोर दिया
उम्मीद न रही तेरे प्यार की जब
लगा जैसे अपनों ने ही मुंह मोड़ लिया
जी रहे थे जिंदगी किसी भ्रम में हम
अब तो उस भ्रम ने भी साथ छोड़ दिया

मुझे दुख है !

Posted by Jasmine Singh on October 3, 2020 at 12:41am 0 Comments

© 2020   Created by Facestorys.com Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Privacy Policy  |  Terms of Service