Monica Sharma's Blog (22)

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Added by Monica Sharma on January 30, 2021 at 10:38am — No Comments

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Added by Monica Sharma on January 29, 2021 at 6:07pm — No Comments

इस बात से डर लगता है

रूठ जाने को दिल चाहता है

पर मनाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

आंखों से बहते है झरने से आंसू

तुम हंसाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

कहते हो मुझ में खूबी बहुत है

गले से लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

इंतज़ार पर तेरे तो हक़ है मेरा

पर इस राह से आओगे या नही

इस बात से डर लगता है

ज़ख़्म इतने है के दिखा ना सके

मरहम लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

तेरे लिए मौत को भी गले लगा ले

आखिरी पल देखने आओगे या नही

इस…

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Added by Monica Sharma on January 24, 2021 at 11:02pm — No Comments

प्यार का रिश्ता

शानदार रिश्ते चाहिए

तो उन्हें गहराई से निभाएं

भूल होती है सभी से

पर अपनों के ज़ख्मों पर मरहम लगाए

तेरी मीठी सी मुस्कान

दवा सा असर दिखाती है

कंधे पर रख कर सिर

जब तू मुझे समझाती है

ग़म की गहरी काली रात भी

खुशनुमा सुबहों में बदल जाती है

मैं साथ हूं तेरे ये बात जब तू दोहराती है

मिस्री सी जैसे मेरे कानों में घुल जाती है

सुनो। कह कर जब बहाने से तू मुझे बुलाती है

मेरे" जी" कहने पर फिर आंखों से शर्माती है

बिन कहे तू जब इतना प्यार…

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Added by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:50pm — No Comments

मेरा सच

जवाब दे सको शायद

ये तेरे लिए मुमकिन ही नही

मगर इंतजार पर आपके

बस हक़ है मेरा

बिन कहे तेरी आंखों को पढ़

ले जिस दिन

समझो इश्क़ मुकमिल हुआ मेरा उस दिन

हसरत है तेरी ज़रूरत नहीं ख्वाहिश बन जाएं

जिद है मेरी हर सांस पे तेरा नाम आए

जिस दिन देख मेरी आंखों की नमी

तुझे महसूस हो जाएं कहीं मेरी कमी

मेरे सवाल तुमसे जुड़ने का बहाना है

वरना हमें भीड़ में भी नही ठिकाना है

जीते है तुझे खुश करने को हम

तेरे आंगन में खुशियों के रंग भरने को…

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Added by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:30pm — No Comments

एक सच

तुम से लड़ते हैं के मेरे
लिए "ख़ास" हो तुम ।
अपने ना होते तो"हार"
कर जाने देते तुम्हें ।
हक़ जताते है तुम पर
क्युकिं
हक़ दिया है तुमने
बेवजह तो इजाज़त"अश्कों"
को भी नही देते हुए हम

मोनिका शर्मा

Added by Monica Sharma on December 4, 2020 at 2:12pm — No Comments

प्रेम

ये प्रेम और परवाह की,
कवायद भी अजीब है।
पाया नही है जिसको,उसे
खोना भी नही चाहते
हो ना सके तेरे जो,
किसी और के भी होना नही चाहते
हमें इश्क़ है तुमसे, ये ज़माने को दिखाएंगे
तेरी ख़ामोशी को अपने ,बोल हम बनाएंगे
मोहब्बत आज भी तुझसे है,कल भी करेंगे
अपनी आख़िरी सांस तक,
हम मोहब्बत ही निभायेगे
तेरे सजदे में एक बार नही
सौ बार सर झुकाएंगे
अगर सच्ची है मोहब्बत मेरी,
तो सातों जन्म हम तुम्हें पाएंगे....

Added by Monica Sharma on November 27, 2020 at 8:00pm — No Comments

इल्ज़ाम ए इश्क़

धीरे-धीरे सब दूर होते गए

वक़्त के आगे मजबूर होते गए

रिश्तों में हमने ऐसी चोट खाई की

बस हम बेवफ़ा और सब बेकसूर होते गए

इल्ज़ामों की श्रृंखला बड़ी लंबी थी साहेब

वो लगाते गए हम मुस्कुराते गए

अपनी झुकी हुई भीगी पलकों के नीचे

जख्म ए इश्क़ हम छुपाते चले गए

बरसों किया इंतजार हमने

तेरी मीठी सी मुस्कान का

पर बेरहम तुम नजरों से

कत्ल करने को खंजर चलाते गए

जिक्र ए इश्क़ जो कभी सुनाई दे

जुबां पे तेरा नाम और

नज़रों में तेरा अक्स दिखाई…

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Added by Monica Sharma on October 14, 2020 at 9:12pm — No Comments

भ्रम

बड़ा गुरूर था हमें अपनी मोहब्बत पर
भ्रम तो तब टूटा जब तेरे वजूद में
अपने लिए जगह भी न मिली
सोचा था तेरे दिल में जगह बना ली है
हकीकत तो तेरी यादों में भी ना थे हम
बड़े बड़े तूफ़ान ना हिला सके हमें
तेरी ख़ामोशी ने झकझोर दिया
उम्मीद न रही तेरे प्यार की जब
लगा जैसे अपनों ने ही मुंह मोड़ लिया
जी रहे थे जिंदगी किसी भ्रम में हम
अब तो उस भ्रम ने भी साथ छोड़ दिया

Added by Monica Sharma on October 5, 2020 at 11:27pm — No Comments

मेरा मन

जाने क्यूं ऐसा व्याकुल और व्यथित है मेरा मन

तेरी ख़ामोश सी निग़ाहों को पढ़ना अब हो गया कठिन

एक दौर था जब हम बिन कहे समझ जाते थे

तेरे मन की हर बात को अपनी आंखों से समझाते थे

मेरे मन के समंदर में गोते लगाती है भावनाएं

शायद तेरे दिल के अक्स पर मेरा प्रतिबिंब बन जाए

प्रेम, प्यार और तृष्णा का बुन गया है ताना बाना

भाव नदी में बह गया मन अब हाथ ना कुछ भी आना

सोचा मन पर संयम रख लूं कर्तव्य सभी मैं पूरे कर लूं

पर जैसे नदी की धारा पर चलता नही है…

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Added by Monica Sharma on October 1, 2020 at 11:42pm — No Comments

मां

मेरी ख़ामोश सी निग़ाहों को

बिन कहे पढ़ लेती है

मेरी भूल को छुपाने को

दुनिया से लड़ लेती है

जो वजूद है मेरा,उसका कहना ही क्या

भगवान से भी पहले, आती है मेरी मां

कितने राज़ थे मेरे

जो दुनिया से छुपाए बैठी है

अपनी पलकों में आंसू

मोती से सजाएं बैठी है

मेरी छोटी सी उफ़ पर

रातों को भूल जाती थी

सिराहने बैठ मेरे प्यार से

सिर को सहलाती थी

टुकड़े हाथों से तोड़ कर

जब मुझे खिलाती थी

खाता देख मुझे उसको

तृप्ति मिल जाती…

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Added by Monica Sharma on September 25, 2020 at 11:45pm — No Comments

मेरा प्यार मुझसे रूठ गया

एक तारा अंबर से टूट सा गया

मेरा प्यार मुझसे रूठ सा गया

जाने किस बात पर की अनबन

तोड़ लिया रिश्ता जैसे टूटे दर्पण

कहा था तुमने कभी तुम छाता हो मेरा

संभालू ठीक से तो उम्र भर रहेगा मेरा

बदलकर आज वो मुझे लूट सा गया

मेरा प्यार मुझसे रूठ सा गया

मनाया लाख पर उसने कहां मानी

मेरे प्यार को समझा कोई झूठी कहानी

हज़ारों बार मैंने उसे फ़रियाद भेजी

पर वक़्त की कमी में उसने न देखी

संग चलने का वादा था वो टूट सा गया

मेरा प्यार मुझसे रूठ सा…

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Added by Monica Sharma on September 22, 2020 at 7:25pm — No Comments

मेरे पतिदेव

लाखों की भीड़ में सबसे जुदा

मानो न मानो वो है मेरा खुदा

दिल में न उसके है कोई फरेब

ऐसे प्यारे से है मेरे पतिदेव

हर जिम्मेदारी को हंस कर निभाना

हो मुश्किल कभी तो लगे गाने गाना

ढूंढ न सकोगे उनमें कोई भी एब

ऐसे प्यारे से है मेरे पतिदेव

चाहत कभी वो जताते नही

मीठी- मीठी बातें कभी वो बनाते नही

सातों जन्म न मिले तो होगा मुझे खेद

ऐसे प्यारे से है मेरे पतिदेव

तेरा गुस्सा और नखरा सब सह जाऊंगी

बहती आंखों से बाते सब कह जाऊंगी

तेरी…

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Added by Monica Sharma on September 18, 2020 at 8:14pm — No Comments

तुम हो ख़ास

दूर रह कर भी तुम से जुड़ी है आस

अब तो समझ जाओ के तुम हो ख़ास

बारिश की पहली बूंद से हो तुम

पत्तों पे गिरी ओस से हो गुम

देखने से तुमको रुकती हर सांस

अब तो समझ जाओ के तुम हो ख़ास

मेरी यादों से जुड़े एहसास हो

मेरी कविता में लिखे अल्फ़ाज़ हो

मेरी आंखों को जो सुकून दे

वो जलता हुआ चिराग हो

राधा मैं तेरी कब रचाओगे रास

अब तो समझ जाओ के तुम हो ख़ास

तेरी आवाज़ की खनक,मेरी आंखो में चमक लाती है

जैसे रेगिस्तान में कही दूर बारिश की सदा आती…

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Added by Monica Sharma on September 16, 2020 at 2:38pm — No Comments

मेरी हिन्दी मेरा मान

हिन्दी दिवस की बेला है,लगा कविताओं का मेला है

सभ्यता का मेल है, शब्दों का अनूठा खेल है

हिंदी की माला में मोती अनेक

सब भाषाओं में सबसे ये नेक

वीणा के साज सा भारत के ताज सा

अपना के हिंदी को खुद पर है नाज़ सा

हिंदी भाषा तो ज्ञान का भंडार है

अमूल्य वेदों का इसमें सार है

अलंकारों से हिंदी का होता श्रृंगार है

वर्णों को जोड़कर बनाया एक हार है

भाषाओं की जननी है, जोड़ने में अग्रणी है

राष्ट्र भाषा का सही इसे मान दिलाया है

हिन्दी का गौरव आज…

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Added by Monica Sharma on September 14, 2020 at 11:03pm — No Comments

तुम इतना याद आओगे

जिंदगी की कशमकश में ऐसे उलझ जाओगे

सोचा ना था कभी तुम इतना याद आओगे

रेत से मेरे हाथों से यूं फिसल जाओगे

सोचा ना था कभी तुम इतना याद आओगे

याद है तुझसे वो पहली मुलाकात

जब मुस्कुराते हुए तूने थामा था मेरा हाथ

अपने हाथों की नमी,मेरे हाथों में छोड़ जाओगे

सोचा ना था कभी तुम इतना याद आओगे

वो छोटी छोटी बातों पर तेरा रूठ जाना

कोशिश करूं हज़ार पर फिर भी ना मुस्कुराना

अब मान भी जाओ, और कितना सताओगे

सोचा ना था कभी तुम इतना याद आओगे

दूरियों से…

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Added by Monica Sharma on September 12, 2020 at 11:55pm — 2 Comments

meri soch

Added by Monica Sharma on September 9, 2020 at 8:50pm — No Comments

umeed

Added by Monica Sharma on September 4, 2020 at 8:13pm — No Comments

एहसास

मर्यादा का घूंघट पहने, जब मैं निकली घर से

बीच राह में कैसी हलचल, भावुक है मन तब से

प्रेम, क्रोध और तृष्णा का बुन गया है ताना बाना

भाव नदी में बह गई मैं,अब हाथ न कुछ भी आना

सोचा खुद पर संयम रख लूं कर्तव्य सभी मैं पूरे कर लूं

पर जैसे नदी की धारा पर चलता नही है ज़ोर

लाख जत्न करने पर भी, मन खींचा मेरा उस ओर

निंदा और प्रशंसा में अब लगे न कोई भेद

झुकती नज़रे रुकती सांसे होने लगा है खेद

जैसे- जैसे समय बीतता हो जाता है ज्ञात

जीवन चक्र तो ऐसे चलता न…

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Added by Monica Sharma on August 31, 2020 at 4:54pm — No Comments

meri khamoshi

Added by Monica Sharma on August 29, 2020 at 6:57pm — No Comments

Blog Posts

पंच तत्व

Posted by Sakshi garg on February 16, 2021 at 11:18pm 0 Comments

जब मुझे पता चला कि तुम पानी हो
तो मै भीग गया सिर से पांव तक ।

जब मुझे पता चला कि तुम हवा की सुगंध हो
तो मैंने एक श्वास में समेट लिया तुम्हे अपने भीतर।

जब मुझे पता चला कि तुम मिट्टी हो
तो मै जड़ें बनकर समा गया तुम्हारी आर्द्र गहराइयों में।

जब मुझे मालूम हुआ कि तुम आकाश हो
तो मै फैल गया शून्य बनकर।

अब मुझे बताया जा रहा है कि तुम आग भी हो•••
तो मैंने खूद को बचा कर रख है तुम्हारे लिए।

तुम !

Posted by Jasmine Singh on February 16, 2021 at 7:23pm 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 30, 2021 at 10:38am 0 Comments

Posted by Monica Sharma on January 29, 2021 at 6:07pm 0 Comments

इस बात से डर लगता है

Posted by Monica Sharma on January 24, 2021 at 11:02pm 0 Comments

रूठ जाने को दिल चाहता है

पर मनाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

आंखों से बहते है झरने से आंसू

तुम हंसाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

कहते हो मुझ में खूबी बहुत है

गले से लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

इंतज़ार पर तेरे तो हक़ है मेरा

पर इस राह से आओगे या नही

इस बात से डर लगता है

ज़ख़्म इतने है के दिखा ना सके

मरहम लगाओगे या नही

इस बात से डर लगता है

तेरे लिए मौत को भी गले लगा ले

आखिरी पल देखने आओगे या नही

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प्यार का रिश्ता

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:50pm 0 Comments

शानदार रिश्ते चाहिए

तो उन्हें गहराई से निभाएं

भूल होती है सभी से

पर अपनों के ज़ख्मों पर मरहम लगाए

तेरी मीठी सी मुस्कान

दवा सा असर दिखाती है

कंधे पर रख कर सिर

जब तू मुझे समझाती है

ग़म की गहरी काली रात भी

खुशनुमा सुबहों में बदल जाती है

मैं साथ हूं तेरे ये बात जब तू दोहराती है

मिस्री सी जैसे मेरे कानों में घुल जाती है

सुनो। कह कर जब बहाने से तू मुझे बुलाती है

मेरे" जी" कहने पर फिर आंखों से शर्माती है

बिन कहे तू जब इतना प्यार…

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मेरा सच

Posted by Monica Sharma on January 7, 2021 at 6:30pm 0 Comments

जवाब दे सको शायद

ये तेरे लिए मुमकिन ही नही

मगर इंतजार पर आपके

बस हक़ है मेरा

बिन कहे तेरी आंखों को पढ़

ले जिस दिन

समझो इश्क़ मुकमिल हुआ मेरा उस दिन

हसरत है तेरी ज़रूरत नहीं ख्वाहिश बन जाएं

जिद है मेरी हर सांस पे तेरा नाम आए

जिस दिन देख मेरी आंखों की नमी

तुझे महसूस हो जाएं कहीं मेरी कमी

मेरे सवाल तुमसे जुड़ने का बहाना है

वरना हमें भीड़ में भी नही ठिकाना है

जीते है तुझे खुश करने को हम

तेरे आंगन में खुशियों के रंग भरने को…

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