Juee Gor's Blog – August 2013 Archive (19)

-- अमृता प्रीतम

मुझे वह समय याद है---
जब धूप का एक टुकड़ा सूरज की उंगली थाम कर
अंधेरे का मेला देखता उस भीड़ में खो गया।
सोचती हूँ: सहम और सूनेपन का एक नाता है
मैं इसकी कुछ नहीं लगती
पर इस छोटे बच्चे ने मेरा हाथ थाम लिया।
तुम कहीं नहीं मिलते
हाथ को छू रहा है एक नन्हा सा गर्म श्वास
न हाथ से बहलता है न हाथ को छोड़ता है।
अंधेरे का कोई पार नही
मेले के शोर में भी खामोशी का आलम है
और तुम्हारी याद इस तरह जैसे धूप का एक टुकड़ा।

Added by Juee Gor on August 31, 2013 at 12:03pm — No Comments

Ramesh Parekh ' રોજ એવું થાય, એવું થાય કે -'

રોજ એવ થાય, એવું થાય કે

આ ખંડમાં બારીના સળિયાઓની પેલે પાર આઘે

ગંધમાં તરબોળ ટેકરીઓ અહીં સૂંઘું

પ્રિયના આશ્ર્લેષમાં પીગળી જતી

કોઇક કંપિતા તણા

લજજાળુ ઉચ્છવાસો સમી

કૈં ઘાસની વિશ્રંભમર્મર સાવ પાસે પી લઉં આકંઠ

લીલી ટોચથી પડતું મૂકીને

ટેકરીના ઘાસવહેતા ઢાળ પરથી દડદડું

કેડી થઇ પાછો ચડી લપસી પડું

ચોમેર તૃણશૈયા વિષે વીંટળાઉ

રોમેરોમથી આતુર આળોટી પડું

આખી ય લીલી વેળ ઝંઝેડી દઉં

સંતાઉં લીલાકાચ ઘેઘૂર ઝૂંડમાં

ને કોઇ ઓચિંતી ઊડેલી… Continue

Added by Juee Gor on August 29, 2013 at 2:30pm — No Comments

પાતળો કાગળ લઈ આકાશનો; કોઇ હોડી ચીતરે વરસાદમાં.

યાદ આછી ફરફરે વરસાદમાં,
આંખ ઝીણું ઝરમરે વરસાદમાં.
બારીની જળમાં થઈ કાલાપલટ,
બારણું ડૂસકાં ભરે વરસાદમાં.
કેટલી વ્યાકુળ તરસની છે તરસ !
કૂવાથાળે કરગરે વરસાદમાં.
મિટ્ટીની ખુશ્બુને પૂરી પામવા,
આભ હેઠું ઊતરે વરસાદમાં.
મોરના ટહુકા ને સણકા છાતીના;
કોણ, ક્યાં ક્યાં વિસ્તરે વરસાદમાં !
પાતળો કાગળ લઈ આકાશનો;
કોઇ હોડી ચીતરે વરસાદમાં.
આંખ ને નભ સર્વ એકાકાર છે;
કોણ આવે ખરખરે વરસાદમાં.
- ભગવતીકુમાર શર્મા

Added by Juee Gor on August 23, 2013 at 10:33pm — No Comments

poem..

ઝાડ સામે દોટ મેલીને હવા પાછી પડી,
એને ઝંઝાવાત બનવાની ઉમર કાચી પડી.
ઝાંઝવા ધારીને તરવૈયા ઘણા ડૂબી ગયા,
રણ વિષેની ધારણા હમેશ ક્યાં સાચી પડી?
જિન્દગી! સીધા ચઢાણ તારી સાથે હું
રહ્યો,
મારે સાથે તું ઊતરતા ઢાળમાં થાકી પડી.
સાવ ઓચિંતુ સભા છોડી કોઈ ચાલ્યું ગયું,
કોઈ ના પૂરી શકે, એવી જગા ખાલી પડી.
છેવટે એક ચપટી અજવાળુંય ના પામી શક્યો,
ક્યાંકથી આવીને દીવાને હવા બાઝી પડી.
- ખલીલ ધનતેજવી.................@

Added by Juee Gor on August 22, 2013 at 3:00pm — No Comments

Gulzar

बस एक चुप सी लगी है, नहीं उदास नहीं!
कहीं पे सांस रुकी है!
नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!
कोई अनोखी नहीं, ऐसी ज़िन्दगी लेकिन!
खूब न हो, मिली जो खूब मिली है!
नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!
सहर भी ये रात भी, दोपहर भी मिली लेकिन!
हमीने शाम चुनी, हमीने शाम चुनी है!
नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!
वो दासतां जो, हमने कही भी, हमने लिखी!
आज वो खुद से सुनी है!
नहीं उदास नहीं, बस एक चुप सी लगी है!!

Added by Juee Gor on August 20, 2013 at 10:38pm — No Comments

Gulzar.... आदतन तुम ने कर दिये वादे आदतन हम ने ऐतबार किया तेरी राहों में हर बार रुक कर हम ने अपना ही इन्तज़ार किया अब ना माँगेंगे जिन्दगी या रब ये गुनाह हम ने एक बार किया

Gulzar....
आदतन तुम ने कर दिये वादे
आदतन हम ने ऐतबार किया
तेरी राहों में हर बार रुक कर
हम ने अपना ही इन्तज़ार किया
अब ना माँगेंगे जिन्दगी या रब
ये गुनाह हम ने एक बार किया

Added by Juee Gor on August 18, 2013 at 11:39am — No Comments

मन की उड़ान

एक बार तो उड़ लेने दो मुझे सपनों के पॅंख
लगाके
गिर जाँऊ भले ही मैं
पर एक बार तो छू लेने दो हवा को ये छोटे
पर फैलाके।
तुम्हारी सच्चाई का भार तुम्हारे सपनों से
बहुत ज्यादा है,
(unknown)

Added by Juee Gor on August 17, 2013 at 9:22pm — No Comments

બુકાની બાંધીને ફરનારાનું આ તો છે નગર, મિત્રો ! મને ખુદને જ મળવામાં ઘણી તકલીફ પહોંચી છે. --

બુકાની બાંધીને ફરનારાનું આ તો છે નગર,
મિત્રો !
મને ખુદને જ મળવામાં ઘણી તકલીફ
પહોંચી છે.
-- મનોજ ખંડેરિયા

Added by Juee Gor on August 16, 2013 at 2:05pm — No Comments

सुन लिया होगा हवाओं में बिखर जाता है, इसलिए बच्चे ने कागज़ पे घरौंदा लिक्खा !

सुन लिया होगा हवाओं में बिखर
जाता है,
इसलिए बच्चे ने कागज़ पे
घरौंदा लिक्खा !

Added by Juee Gor on August 15, 2013 at 6:02pm — No Comments

એને મૃગજળથી સપનું પલાળવું હતું મારે સપનાનું ફૂલ ત્યાં ઉગાડવું હતું.

એને મૂળમાંથી ઝાડવું ઉખાડવું હતું,
મારે માળામાં બુલબુલને પાળવું હતું.
પંખી બનીને એ ઊડી જો હોત તો
જીવતરની ફેર કરત માગણી
બત્તીના થાંભલેથી બલ્બ ઊડી જાય એમ
ઊડી ગઈ ઓચિંતી લાગણી.
એને સૂરજથી જળને દઝાડવું હતું,
મારે પાણીને બર્ફમાં સુવાડવું હતું.
એક એક કિરણોને જીવ જેમ સાચવું
તોય તૂટી જાય રોજ સાંજ,
એક દિવસ સ્વરપેટી જાતે ઉઘાડી,
તો અંદર તૂટેલો અવાજ.
એને મૃગજળથી સપનું પલાળવું હતું
મારે સપનાનું ફૂલ ત્યાં ઉગાડવું હતું.
- મુકેશ જોષી

Added by Juee Gor on August 13, 2013 at 10:02pm — No Comments

Dushyant Kumar...

ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दुहरा हुआ
होगा[1]
मैं सजदे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा
यहाँ तक आते-आते सूख जाती हैं कई नदियाँ
मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा

Added by Juee Gor on August 13, 2013 at 8:34am — No Comments

कोई इस चाँद से तो पूछे कि उसका मजहब क्या है... कल ईद पर मुस्कुरा रहा था... आज तीज पर खिलखिला रहा है... न वो टोपी पहनता है ना वो तिलक लगाता ह

कोई इस चाँद से तो पूछे कि उसका मजहब
क्या है...
कल ईद पर मुस्कुरा रहा था... आज तीज पर
खिलखिला रहा है...
न वो टोपी पहनता है ना वो तिलक
लगाता ह

Added by Juee Gor on August 12, 2013 at 12:27pm — No Comments

ग़रीब माँ अपने बच्चों को बड़े प्यार से यूँ मनाती है , फिर बना लेंगे नए कपडे ये ईद तो हर साल आती है !!

ग़रीब माँ अपने बच्चों को बड़े प्यार से यूँ
मनाती है ,
फिर बना लेंगे नए कपडे ये ईद तो हर साल
आती है !!

Added by Juee Gor on August 11, 2013 at 9:27pm — No Comments

Good morning...

चेहरा बता रहा था के मारा है भूख ने,
लोग कह रहे थे कुछ खा के मर गया |

Added by Juee Gor on August 10, 2013 at 10:19am — No Comments

Good morning...

મારું નિર્જળ શહેર આખું પાણીપાણી છે હવે !
પત્રમાં સરિયામ ચોમાસું તેં ચીતરાવ્યું હશે

Added by Juee Gor on August 9, 2013 at 9:46am — No Comments

Good morning...

तुमने कभी खुदा से बात की है..
रिमझिम बारिशों मे सर उठा के
देखो...

Added by Juee Gor on August 7, 2013 at 9:58am — No Comments

Good morning...

सो जाते हैं फुटपाथ पर अखबार बिछाकर,
मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाते !!

Added by Juee Gor on August 5, 2013 at 9:52am — No Comments

Good night

હવે પાંપણોમાં અદાલત ભરાશે
મેં સ્વપ્ન નિરખવાના ગુના કર્યા છે
– રમેશ પારેખ

Added by Juee Gor on August 3, 2013 at 11:31pm — No Comments

Good morning...

कभी कभी तो छलक पड़ती हैं यूँही आँखें
उदास होने का कोई सबब नहीं होता
- बशीर बद्र...........

Added by Juee Gor on August 2, 2013 at 9:53am — 1 Comment

Blog Posts

परिक्षा

Posted by Hemshila maheshwari on March 10, 2024 at 5:19pm 0 Comments

होती है आज के युग मे भी परिक्षा !



अग्नि ना सही

अंदेशे कर देते है आज की सीता को भस्मीभूत !



रिश्तों की प्रत्यंचा पर सदा संधान लिए रहेता है वह तीर जो स्त्री को उसकी मुस्कुराहट, चूलबलेपन ओर सबसे हिलमिल रहेने की काबिलियत पर गडा जाता है सीने मे !



परीक्षा महज एक निमित थी

सीता की घर वापसी की !



धरती की गोद सदैव तत्पर थी सीताके दुलार करने को!

अब की कुछ सीता तरसती है माँ की गोद !

मायके की अपनी ख्वाहिशो पर खरी उतरते भूल जाती है, देर-सवेर उस… Continue

ग़ज़ल

Posted by Hemshila maheshwari on March 10, 2024 at 5:18pm 0 Comments

इसी बहाने मेरे आसपास रहने लगे मैं चाहता हूं कि तू भी उदास रहने लगे

कभी कभी की उदासी भली लगी ऐसी कि हम दीवाने मुसलसल उदास रहने लगे

अज़ीम लोग थे टूटे तो इक वक़ार के साथ किसी से कुछ न कहा बस उदास रहने लगे

तुझे हमारा तबस्सुम उदास करता था तेरी ख़ुशी के लिए हम उदास रहने लगे

उदासी एक इबादत है इश्क़ मज़हब की वो कामयाब हुए जो उदास रहने लगे

Evergreen love

Posted by Hemshila maheshwari on September 12, 2023 at 10:31am 0 Comments

*પ્રેમમય આકાંક્ષા*



અધૂરા રહી ગયેલા અરમાન

આજે પણ

આંટાફેરા મારતા હોય છે ,

જાડા ચશ્મા ને પાકેલા મોતિયાના

ભેજ વચ્ચે....



યથાવત હોય છે

જીવનનો લલચામણો સ્વાદ ,

બોખા દાંત ને લપલપતી

જીભ વચ્ચે



વીતી ગયો જે સમય

આવશે જરુર પાછો.

આશ્વાસનના વળાંકે

મીટ માંડી રાખે છે,

ઉંમરલાયક નાદાન મન



વળેલી કેડ ને કપાળે સળ

છતાંય

વધે ઘટે છે હૈયાની ધડક

એના આવવાના અણસારે.....



આંગણે અવસરનો માહોલ રચી

મૌન… Continue

जिन्दा हों तो जिंदगी कि मिसाल बनो

Posted by Pooja Yadav shawak on July 31, 2021 at 10:01am 0 Comments

जिन्दा हों तो जिंदगी कि मिसाल बनो

झूठ का साथी नहीं सच का सवाल बनो

यूँ तो जलती है माचिस कि तीलियाँ भी

बात तो तब है जब धहकती मशाल बनो



रोक लो तूफानों को यूँ बांहो में भींचकर

जला दो गम का लम्हा दिलों से खींचकर

कदम दर कदम और भी ऊँची उड़ान भरो

जिन्दा हों तो जिंदगी कि मिसाल बनो

झूठ का साथी नहीं सच का सवाल बनो



यूँ तो अक्सर बातें तुझ पर बनती रहेंगी

तोहमते तो फूल बनकर बरसा ही करेंगी

एक एक तंज पिरोकर जीत का हार करो

जिन्दा हों तो जिंदगी… Continue

No more pink

Posted by Pooja Yadav shawak on July 6, 2021 at 12:15pm 1 Comment

नो मोर पिंक

क्या रंग किसी का व्यक्तित्व परिभाषित कर सकता है नीला है तो लड़का गुलाबी है तो लड़की का रंग सुनने में कुछ अलग सा लगता है हमारे कानो को लड़कियों के सम्बोधन में अक्सर सुनने की आदत है.लम्बे बालों वाली लड़की साड़ी वाली लड़की तीख़े नयन वाली लड़की कोमल सी लड़की गोरी इत्यादि इत्यादि

कियों जन्म के बाद जब जीवन एक कोरे कागज़ की तरह होता हो चाहे बालक हो बालिका हो उनको खिलौनो तक में श्रेणी में बाँट दिया जता है लड़का है तो कार से गन से खेलेगा लड़की है तो गुड़िया ला दो बड़ी हुई तो डांस सिखा दो जैसे… Continue

यूँ ही मिल जाती जिंदगी तो क्या बात थी

Posted by Pooja Yadav shawak on June 25, 2021 at 10:04pm 0 Comments

यूँ ही मिल जाती जिंदगी तो क्या बात थी
मुश्किलों ने तुझे पाने के काबिल बना दिया
न रुलाती तू मुझे अगर दर्द मे डुबो डुबो कर
फिर खुशियों की मेरे आगे क्या औकात थी
तूने थपकियों से नहीं थपेड़ो से सहलाया है
खींचकर आसमान मुझे ज़मीन से मिलाया है
मेरी चादर से लम्बे तूने मुझे पैर तो दें डाले
चादर को पैरों तक पहुंचाया ये बड़ी बात की
यूँ ही मिल जाती जिंदगी तो क्या बात थी
मुश्किलों ने तुझे पाने के काबिल बना दिया
Pooja yadav shawak

Let me kiss you !

Posted by Jasmine Singh on April 17, 2021 at 2:07am 0 Comments

वो जो हँसते हुए दिखते है न लोग अक्सर वो कुछ तन्हा से होते है पराये अहसासों को लफ़्ज देतें है खुद के दर्द पर खामोश रहते है जो पोछतें दूसरे के आँसू अक्सर खुद अँधेरे में तकिये को भिगोते है वो जो हँसते…

Posted by Pooja Yadav shawak on March 24, 2021 at 1:54pm 1 Comment

वो जो हँसते हुए दिखते है न लोग
अक्सर वो कुछ तन्हा से होते है
पराये अहसासों को लफ़्ज देतें है
खुद के दर्द पर खामोश रहते है
जो पोछतें दूसरे के आँसू अक्सर
खुद अँधेरे में तकिये को भिगोते है
वो जो हँसते हुए दिखते है लोग
अक्सर वो कुछ तन्हा से होते है

© 2024   Created by Facestorys.com Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Privacy Policy  |  Terms of Service