Tushar Gandhi

Author Name : Tushar Arun Gandhi

Book Name : Let's Kill Gandhi

Author Bio : Tushar Arun Gandhi (born 17 January 1960) is the son of journalist Arun Manilal Gandhi, grandson of Manilal Gandhi and great-grandson of Mahatma Gandhi. In March 2005, he led the 75th anniversary re-enactment of the Dandi March. From 2007 to 2012, he was the Goodwill Ambassador of the CISRI-ISP Intergovernmental Institution for the use of Micro-algae Spirulina Against Malnutrition.

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Syahee.com in conversation with Tushar Arun Gandhi : Interview 

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Blog Posts

Why You Should Hire the Movers in Advance?

Posted by Monali Swain on November 19, 2020 at 3:23pm 0 Comments

You should hire the right of the packers and mover in advance as this gives you many advantages. If you are thinking about the advantages, you get, then that will be more in numbers. You want the brief, then this article…

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कुछ इस तरह!

Posted by Jasmine Singh on November 13, 2020 at 9:32am 0 Comments

कुछ इस तरह लिपटी हैं
तेरी पलकें मेरे दिल के तारों से
मज़ार के धागों से
कोई मन्नत लिपटी हो जैसे
©Reserved by Jasmine Singh

શું? આ છે જિંદગી !

Posted by Sonu on October 15, 2020 at 7:36pm 0 Comments

મૃગ તરસે જળ દોડી દોડી હાથધર્યું ઝાંઝવાનીર, માનવ ભૂખ્યો પ્રેમનો મથામણ કરી પામ્યો વહેમ 

શું? આ છે જિંદગી !

રોણુ જન્મ ને મરણ સમયે સમાન મનોવ્યથા, આંતરીક ગુપશુપ ચાલી રહી ભીતર

શુ ? આ છે જિંદગી !

રાજકુમારો ને મહેલોના સપનામાં  રાચતા, આંખો ખુલી અરે ! આતો મૃગજળસમું સ્વપ્નલોક

શુ? આ છે જિંદગી !

મુખપર હસી ઠીઠોલી, મનમાં કરોડો તરંગ ઉછળે! વિચારે તો જાણે ઘેરો ઘાલ્યો

શુ? આ છે જિંદગી !

ભોરથતા આશબંધણીકાલે નહીતો આજે, હશે પિયુ સંગ સ્નેહમિલન પણ આતો…

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तुझको लिखती रहूंगी मैं !

Posted by Jasmine Singh on October 15, 2020 at 1:22am 0 Comments

तुझे लिखती रहूंगी मैं

तेरे प्यार की स्याही में

अपनी कलम को डुबो कर

इस ज़िंदगी के पन्नों पे

तेरे साथ जिये लम्हों को

कविताओं में बुनकर

तुझको लिखती रहूंगी मैं

तुझको जीती रहूंगी मैं

तू वो है जो मेरे साथ है

और मेरे बाद भी रहेगा

कभी किसी के होठों में हंसेगा

किसी की आंखों से बहेगा

किसी अलमारी के पुराने

दराज की खुशबु में महकेगा

किसी की आंखों की गहराई

जब जब मेरे शब्दों में उतरेगी

तब तब मेरे बाद तुझे पढ़ने वालों के…

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इल्ज़ाम ए इश्क़

Posted by Monica Sharma on October 14, 2020 at 9:12pm 0 Comments

धीरे-धीरे सब दूर होते गए

वक़्त के आगे मजबूर होते गए

रिश्तों में हमने ऐसी चोट खाई की

बस हम बेवफ़ा और सब बेकसूर होते गए

इल्ज़ामों की श्रृंखला बड़ी लंबी थी साहेब

वो लगाते गए हम मुस्कुराते गए

अपनी झुकी हुई भीगी पलकों के नीचे

जख्म ए इश्क़ हम छुपाते चले गए

बरसों किया इंतजार हमने

तेरी मीठी सी मुस्कान का

पर बेरहम तुम नजरों से

कत्ल करने को खंजर चलाते गए

जिक्र ए इश्क़ जो कभी सुनाई दे

जुबां पे तेरा नाम और

नज़रों में तेरा अक्स दिखाई…

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आसमान से ऊंचा

Posted by Sakshi garg on October 14, 2020 at 10:16am 1 Comment

अक्सर सिर की छत बन कर धूप और बारिश से बचा लेता है पिता...

यूं ही नहीं उसे आसमान से भी ऊंचा कहते ।

दो बातें

Posted by Sakshi garg on October 14, 2020 at 10:13am 0 Comments

कुछ बातें इन दो कारणों से भी तकलीफ दे देती हैं : 

1• काश ! ये सब सच होता ।;

2• काश ! ये सब झूठ होता ।

पिता

Posted by Sakshi garg on October 10, 2020 at 9:02pm 0 Comments

मुझे रखा छांव में, खुद जलते रहे धूप में...

हां मैंने देखा है फरिश्ता अपने पिता के रूप में ।।

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