साल 2001 मे बक्षी साहब से उनके पुस्तक -स्पीड़ब्रेकर-के निबंघो का हिन्दी अनुवाद की इज़ाज़त हेतु प्रथम बार ही फोन पर मेरी बात हुई थी। पूर्व में हमारी कोई मुलाकात नही हुई थी परंतु फोन पर ही उन्होंने बगैर कोइ सवाल कीए अनुवाद की इज़ाज़त देकर मुझे गद-गद कर दीया। प्रथम बार जब उनसे रुबरु होने का अवसर प्राप्त हुअा उस रोज जब तक उनसे मुखातिब नहीं हुुआ तब तक की स्थिती को मैं बयां नहीं कर सकता। प्रथम मुलाकात के समय उन्होंने हस्तधुनन हेतु मेरा हाथ अपने नरम कोमल हाथों मे लिया उस क्षणों को मैंने अपने जीवन के स्वर्णिम क्षणों की तरह संजो कर रखा है। अनुवादित पुस्तक से वे काफी खुश हुए और मुझे पत्र भी लिखा,कुछ गलतियॉं भी बताई,मार्गदर्शन भी कीया। अंत मे कुछ हिदायतें देते हुए जो अहम बात कही वो बड़ी ला-जवाब और दिल को बाग-बाग करने वाली थी ।उन्होने पत्र में लिखा है - गलतीयों की चिंता मत करना चिंता करने वाले खुब मिल जाएंगे - । फीर तो हमारी काफी समय मुलाकातें हुई ,एक प्रमुख अखबार में वे मेरे मार्गदर्शक भी रहे परंतु उनकी हर मुलाकात के बाद दुसरी मुलाकात की ललक हंमेशा बनी रहती थी। आज के लिए बस इतना ही, शेष फिर कभी। 8/5/15 मुकेश पंडया
Ashok
Nov 22, 2013
mukesh pandya
साल 2001 मे बक्षी साहब से उनके पुस्तक -स्पीड़ब्रेकर-के निबंघो का हिन्दी अनुवाद की इज़ाज़त हेतु प्रथम बार ही फोन पर मेरी बात हुई थी। पूर्व में हमारी कोई मुलाकात नही हुई थी परंतु फोन पर ही उन्होंने बगैर कोइ सवाल कीए अनुवाद की इज़ाज़त देकर मुझे गद-गद कर दीया। प्रथम बार जब उनसे रुबरु होने का अवसर प्राप्त हुअा उस रोज जब तक उनसे मुखातिब नहीं हुुआ तब तक की स्थिती को मैं बयां नहीं कर सकता। प्रथम मुलाकात के समय उन्होंने हस्तधुनन हेतु मेरा हाथ अपने नरम कोमल हाथों मे लिया उस क्षणों को मैंने अपने जीवन के स्वर्णिम क्षणों की तरह संजो कर रखा है। अनुवादित पुस्तक से वे काफी खुश हुए और मुझे पत्र भी लिखा,कुछ गलतियॉं भी बताई,मार्गदर्शन भी कीया। अंत मे कुछ हिदायतें देते हुए जो अहम बात कही वो बड़ी ला-जवाब और दिल को बाग-बाग करने वाली थी ।उन्होने पत्र में लिखा है - गलतीयों की चिंता मत करना चिंता करने वाले खुब मिल जाएंगे - । फीर तो हमारी काफी समय मुलाकातें हुई ,एक प्रमुख अखबार में वे मेरे मार्गदर्शक भी रहे परंतु उनकी हर मुलाकात के बाद दुसरी मुलाकात की ललक हंमेशा बनी रहती थी। आज के लिए बस इतना ही, शेष फिर कभी। 8/5/15 मुकेश पंडया
May 8, 2015
Purvi Shah
My favourite writer..
Feb 26, 2016